पिच की हालत क्रिकेट मैच को कैसे बदलती है

Laws पिच के बारे में क्या कहते हैं, सतह पाँच दिनों में कैसे घिसती है, ओस शाम के मैच क्यों तय करती है, ICC की पिच रेटिंग और टीम चयन पर असर।

लिखा: अंजलि देशमुखजाँच: राजीव साठे

अपडेट 1 सितंबर 2026 · स्रोत: 8

क्रिकेट पिच 22 गज लंबी और 10 फुट चौड़ी एक पट्टी है। उस पर घास कितनी है, वह कितनी सूखी है और कितनी घिसी है — यही तय करता है कि गेंद सीम होगी, टर्न लेगी, या उठकर मार खाने के लिए आएगी।

यह पेज सतह के मुख्य प्रकार देखता है। यह दिखाता है कि पट्टी पाँच दिनों में कैसे बदलती है, और ओस शाम के मैच को क्यों झुका देती है। साथ ही यह भी कि ICC पिचों को कैसे आँकता है, और यह सब टीम चयन में कैसे उतरता है।

पिच असल में है क्या

पिच बीच वाली पट्टी है। वह पट्टी गेंद के साथ जो करती है, वही पूरे मैच को चलाती है।

MCC Laws का Law 6 उसका नाप तय करता है। यह 22 गज, यानी 20.12 मीटर लंबा एक आयत है। चौड़ाई 10 फुट, यानी 3.05 मीटर।

क्रिकेट पिच पर सामान्य संदर्भ वही नाप देता है। आधुनिक खेल में 22 गज की लंबाई नहीं बदली है।

देखभाल किसकी ज़िम्मेदारी है, यह भी तय है। मैच से पहले ग्राउंड अथॉरिटी पिच तैयार करती है। मैच के दौरान अंपायर उसके इस्तेमाल और रखरखाव को नियंत्रित करते हैं। खेलने लायक है या नहीं, यह सिर्फ़ अंपायर तय करते हैं।

मैच के बीच मनमर्ज़ी से पिच नहीं बदली जा सकती। वह तभी बदलती है जब अंपायर तय करें कि उस पर खेलना खतरनाक या अनुचित है। दोनों कप्तानों की सहमति भी ज़रूरी है।

सतह के मुख्य प्रकार

ग्राउंड स्टाफ एक ही स्क्वेयर से बहुत अलग-अलग पट्टियाँ बना सकता है। तीन मोटे प्रकार ज़्यादातर क्रिकेट को ढक लेते हैं।

घास वाली, सख्त पिच नमी रोकती है और अपना उछाल बनाए रखती है। गेंद सीम से हटती है। तेज़ गेंदबाज़ों को कैरी मिलती है। ऐसे ग्रीन टॉप इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ़्रीका से जुड़े हैं।

सूखी, नंगी पिच पर घास कम होती है और ऊपरी मिट्टी ढीली। गेंद पकड़ती है और टर्न लेती है। वह सतह में रुक भी सकती है। भारत में घरेलू क्रिकेट काफ़ी हद तक ऐसी ही पट्टियों पर खेला जाता है।

सपाट, सख्त पिच, जिस पर उछाल एक जैसा हो और घास न हो, बल्लेबाज़ी के लिए ठीक रहती है। गेंद ऐसी ऊँचाई पर आती है जिस पर बल्लेबाज़ भरोसा कर सके। बल्लेबाज़ को सबसे ज़्यादा यही चाहिए।

ये रुझान हैं, नियम नहीं। कोई दस्तावेज़ «ग्रीन पिच» को परिभाषित नहीं करता। कोई आधिकारिक संस्था उस पर मुहर नहीं लगाती।

टेबल 1. पिच का प्रकार, वह किसकी मदद करती है, और पारी आमतौर पर कैसे चलती है

पिच का प्रकार

आमतौर पर किसकी मदद

पारी का आम ढर्रा

हरी और घास वाली

सीम और स्विंग गेंदबाज़

शुरुआती विकेट, फिर चमक जाने के बाद आसान

सूखी और नंगी

स्पिन गेंदबाज़

ठहरी हुई शुरुआत, फिर सतह पकड़ने पर ढेर

सपाट और सख्त

बल्लेबाज़

बड़े स्कोर और किसी भी दिन कम विकेट

दरारों वाली और घिसी हुई

जो भी दरारों पर गेंद डाले

असमान उछाल; रन बनाना जोखिम भरा हो जाता है

पिच पाँच दिनों में कैसे बदलती है

टेस्ट में पिच खुद कहानी का एक किरदार होती है। पाँचवें दिन की सतह पहले दिन जैसी नहीं होती।

पहला दिन अक्सर सबसे ताज़ा होता है। सतह में नमी बची होती है। इसलिए सीम गेंदबाज़ों को शुरू में मदद मिलती है, और उसके बाद बल्लेबाज़ी आसान होती जाती है।

तीसरे दिन तक सतह सूख चुकी होती है। गेंदबाज़ों के पैरों के निशान उभर आते हैं। वही खुरदुरे हिस्से स्पिनर का निशाना होते हैं।

चौथे और पाँचवें दिन तक दरारें चौड़ी होती हैं और सतह टूटने लगती है। उछाल असमान हो जाता है। आखिर में बल्लेबाज़ी करना अक्सर मैच का सबसे मुश्किल काम होता है।

कुछ रखरखाव की इजाज़त है, पर ज़्यादा नहीं। Law 9 के तहत बल्लेबाज़ी करने वाला कप्तान सात मिनट तक रोलिंग माँग सकता है। यह अधिकार पहली पारी को छोड़कर हर पारी से पहले, और हर नए दिन के खेल से पहले रहता है। ढीले टुकड़े खेल से पहले, पारियों के बीच और भोजन के अंतराल पर बुहार दिए जाते हैं।

इसीलिए कुछ पिचों पर टॉस दूसरों से ज़्यादा मायने रखता है। कप्तान यह चुन रहा होता है कि उसे पट्टी का कौन-सा रूप बल्लेबाज़ी के लिए चाहिए।

ICC की टेस्ट प्लेइंग कंडीशंस भी यहाँ मायने रखती हैं। एक दिन छूटे ओवर बाद में पूरे नहीं किए जाते। इसलिए धीमा दिन यह बदल देता है कि सतह कितनी घिसेगी।

गेंद भी घिसती है

पिच और गेंद साथ-साथ घिसती हैं। एक को दूसरे के बिना नहीं पढ़ा जा सकता।

नई गेंद सख्त और चमकदार होती है। Law 4 पुरुषों की गेंद 155.9 से 163 ग्राम तय करता है। उसकी परिधि 22.4 से 22.9 सेंटीमीटर होनी चाहिए।

लंबे मैच में फ़ील्डिंग कर रहा कप्तान नई गेंद माँग सकता है। यह अधिकार तब शुरू होता है जब पुरानी गेंद से 80 पूरे ओवर डाले जा चुके हों। खुरदुरी, सूखी सतह पर पुरानी गेंद तेज़ी से घिसती है। इससे रिवर्स स्विंग को मदद मिलती है।

ODI में गेंद की व्यवस्था 2025 में बदली। ICC की ODI कंडीशंस के तहत दो गेंदें सिर्फ़ 34वें ओवर तक बदल-बदलकर चलती हैं। उसके बाद बाकी पारी के लिए एक गेंद चुन ली जाती है। वह अकेली गेंद स्क्वेयर से ज़्यादा घिसती है। पूरा मकसद यही है।

हर फ़ॉर्मैट के नियम हमारे 50 ओवर वाले गाइड और टेस्ट गाइड में हैं।

ओस, और शाम के मैच अलग क्यों होते हैं

भारत के बड़े हिस्से में डे-नाइट मैच में सूरज ढलने के बाद ओस आ जाती है। सीमित ओवर वाले खेल में ओस सबसे बड़ी अकेली ताक़तों में से एक है।

ओस गेंद को गीला और भारी कर देती है। पकड़ जाती रहती है। तब स्पिनरों को टर्न कराने में दिक्कत होती है, और तेज़ गेंदबाज़ों की सीम पर पकड़ ढीली पड़ती है।

ओस आउटफ़ील्ड की घास को भी बिछा देती है। गेंद फिर फिसलकर रस्सी तक जाती है। फ़ील्डिंग कठिन हो जाती है, और कैच छूटना बढ़ जाता है।

इसलिए फ़्लडलाइट में पीछा करने वाली टीम का काम अक्सर आसान होता है। कप्तान खुलकर कहते हैं कि ओस वाले मैदानों पर वे पहले गेंदबाज़ी करना चाहते हैं।

ग्राउंड स्टाफ स्प्रे से इससे लड़ता है। वे ओवरों के बीच आउटफ़ील्ड भी पोंछते हैं। हमने जो भी प्लेइंग कंडीशन पढ़ी, उनमें से किसी ने ओस को कोई दर्जा नहीं दिया। कोई नियम इसकी भरपाई नहीं करता।

इस खाई का DLS जैसा कोई हल नहीं है। हाँ, खेल एक तरह की रुकावट को ज़रूर संभालता है। बारिश से वह कैसे निपटता है, यह हमारा DLS एक्सप्लेनर दिखाता है।

ICC पिच को कैसे आँकता है

पिचों को आधिकारिक ग्रेड मिलता है। यह सिर्फ़ कमेंट्री बॉक्स की बात नहीं है।

ICC की पिच और आउटफ़ील्ड रेटिंग प्रक्रिया यह काम मैच रेफ़री को देती है। वह हर टेस्ट, ODI और T20 इंटरनेशनल के बाद पिच और आउटफ़ील्ड, दोनों को आँकता है। रेटिंग मेज़बान सदस्य बोर्ड को जाती है।

«Unsatisfactory» या «Unfit» रेटिंग मानक से नीचे मानी जाती है। तब बोर्ड और मैदान को अपनी सफ़ाई देनी होती है। ICC मैदान को सज़ा भी दे सकता है।

ICC का पेज न कोई सीमा-अंक छापता है, न जुर्माने के आँकड़े। ESPNcricinfo की इस व्यवस्था पर समीक्षा कमियाँ भरती है। वह कहती है कि व्यवस्था 2006 में शुरू हुई और जनवरी 2018 में अपडेट हुई। वह छह रेटिंग गिनाती है, «बहुत अच्छी» से लेकर «अनफ़िट» तक, और हर एक के साथ डीमेरिट अंक जुड़े हैं।

रिपोर्ट किए गए पैमाने के हिसाब से औसत से नीचे वाली पिच पर एक अंक है। खराब पिच पर तीन अंक, और अनफ़िट पर पाँच। पाँच साल की चलती खिड़की में पाँच अंक होने पर मैदान 12 महीने के लिए बंद बताया जाता है। दस अंक पर दो साल के लिए।

डीमेरिट अंकों की मौजूदा सीमाएँ और प्रतिबंध की अवधि हमें अब भी ICC की नियम-पुस्तिका से चाहिए। हमारे आँकड़े 2018 की एक खबर से हैं, ICC के पेज से नहीं। वह पेज कोई आँकड़ा नहीं देता।

हालात टीम चयन को कैसे बदलते हैं

चयनकर्ता विरोधी टीम से पहले पिच पढ़ते हैं। यहीं पट्टी रणनीति में बदल जाती है।

सूखी, टर्न लेने वाली सतह पर टीम दो या तीन स्पिनर तक खिला सकती है। भारत ने घरेलू मैदानों पर अक्सर ऐसा ही चुना है।

हरी, सीम होने वाली सतह पर अतिरिक्त स्पिनर की जगह अतिरिक्त तेज़ गेंदबाज़ ले लेता है। शुद्ध गेंदबाज़ के बजाय बल्लेबाज़ी कर सकने वाले ऑलराउंडर को मौका मिलता है।

बल्लेबाज़ी क्रम भी खिसकता है। टर्न की उम्मीद करने वाली टीम उस खिलाड़ी को ऊपर भेज सकती है जो स्वीप अच्छा खेलता है। उछाल की उम्मीद करने वाली टीम को कसी हुई, ठोस तकनीक वाला ओपनर चाहिए होगा।

गेंदबाज़ी की योजना मैच के भीतर भी बदलती है। मान लीजिए कप्तान घास वाली पट्टी पर टॉस जीतता है। वह अपने सबसे तेज़ गेंदबाज़ों से लंबा पहला स्पेल कराएगा, जब तक नमी टिकी है।

इसमें से कुछ भी किसी एक स्टेडियम पर अंदाज़ा नहीं है। हम यह नहीं बताते कि कोई नामित मैदान कैसा खेलता है। अलग-अलग मैदानों को आँकने वाला कोई मौजूदा स्रोत हमारे पास नहीं है।

पिच रिपोर्ट आपको क्या नहीं बता सकती

पिच रिपोर्ट एक समझदार अंदाज़ा है। वह डेटा नहीं है।

वही पट्टी नए मौसम में नए तरीके से बर्ताव कर सकती है। बादलों की चादर स्विंग को सतह से ज़्यादा बदल देती है।

मैच वाली सुबह पानी देने और रोलिंग के जो फ़ैसले हुए, वे कोई नहीं छापता। मिट्टी में नमी कितनी है, यह भी निजी रहता है।

तो पिच की चर्चा को कई संकेतों में से एक मानिए। फ़ॉर्मैट के बीच असल में क्या बदलता है, यह हमारा फ़ॉर्मैट गाइड बताता है। शुरुआत के लिए वह ज़्यादा ठोस जगह है।

इनमें से ज़्यादातर असर दो नियम-सेट से चलते हैं। जिन हिस्सों को फैन सबसे ज़्यादा गलत समझते हैं, उन्हें हमारा T20 नियम-पुस्तिका और DRS गाइड देखते हैं।

हमने यह पेज कैसे जाँचा

पिच की चर्चा वही जगह है जहाँ क्रिकेट लेखन सबसे ज़्यादा गढ़ता है। इसलिए हम वहीं टिके जो दस्तावेज़ कहते हैं।

नाप और रखरखाव के नियम MCC Laws से हैं। रेटिंग प्रक्रिया ICC के पेज से है। डीमेरिट अंक एक खबर से हैं, और हमने उन्हें वैसा ही चिह्नित किया है।

जहाँ कोई नियम है ही नहीं, वहाँ हमने यह कह दिया है। ओस इसका सबसे साफ़ उदाहरण है। मानक हमारी जाँच पद्धति समझाती है। सुधार हमारे करेक्शन पेज पर दर्ज होते हैं। हर एक्सप्लेनर गाइड हब पर है।

लोग जो पूछते हैं

क्रिकेट पिच कितनी लंबी और चौड़ी होती है?

वह 22 गज, यानी 20.12 मीटर लंबी होती है। चौड़ाई 10 फुट, यानी 3.05 मीटर। नाप MCC Laws के Law 6 में तय हैं।

क्या मैच के दौरान पिच पर रोलर चलाया जा सकता है?

हाँ, सीमा के भीतर। Law 9 बल्लेबाज़ी करने वाले कप्तान के माँगने पर सात मिनट तक रोलिंग की इजाज़त देता है। वह पहली पारी को छोड़कर हर पारी से पहले, और हर नए दिन के खेल से पहले माँग सकता है।

ओस पीछा करने वाली टीम के पक्ष में क्यों जाती है?

गीली गेंद पकड़ना मुश्किल होता है। स्पिन और सीम मूवमेंट गिर जाते हैं। गेंद नम आउटफ़ील्ड पर फिसलती भी है। कोई प्लेइंग कंडीशन इसकी भरपाई नहीं करती। इसलिए कप्तान ओस वाले मैदानों पर बस पहले गेंदबाज़ी करने की कोशिश करते हैं।

पिच खेलने लायक है या नहीं, यह कौन तय करता है?

अंपायर, और सिर्फ़ अंपायर। मैच से पहले ग्राउंड स्टाफ पिच तैयार करता है। खेल शुरू होते ही अंपायर उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करते हैं और तय करते हैं कि वह ठीक है या नहीं।

क्या ICC खराब पिचों को सज़ा देता है?

दे सकता है। ICC की रेटिंग प्रक्रिया में मैच रेफ़री हर इंटरनेशनल के बाद पिच को ग्रेड देता है। मानक से नीचे का ग्रेड बोर्ड से जवाब माँगता है, और उस पर जुर्माना भी आ सकता है। ICC का पेज कोई सीमा-अंक नहीं छापता।

गाइड सेक्शन से और